लाखों लोग बर्बाद हो गये, इस दहेज़ की बोली में
अर्थी चढी हजारों कन्या, बैठ न पाई डोली में
जिस पर बीतती वाही जानता है, शब्द नहीं ये कहने के
कितनो ने बेचे मकान है, अब तक अपने रहने के
फ़िर भी वे रुके नहीं है, अब तक मानवता की भाषा में
अपनी मांग बढ़ते जाते, परधन की अभिलाषा में
आग लगे ऐशे दहेज़ को, मानवता की टोली में
लाखों घर बरबाद हो गये, इस दहेज़ की बोली में॥
अर्थी चढी हजारों कन्या, बैठ न पाई डोली में
तुमको भी दुःख होगा, अपनी कन्याओं की शादी में
मन ललचाना बंद करो, अब धैर्य रखो निज आधी में
कितनो ने अपनी कन्या के, पीले हाथ करने में
कहाँ -कहाँ न मस्तक टेके, आती शर्म बताने में
गहने, खेत, मकान रख दिए, सिर्फ़ मांग की रोली में
लाखों लोग बर्बाद हो गये, इस दहेज़ की बोली
में अर्थी चढी हजारों कन्या, बैठ न पाई डोली में
Thursday, 25 December 2008
गंजे मित्र
एक गंजे हमारे मित्र थे
हर एंगल से विचित्र थे
एक दिन वे मेरे पास आए
...और रोने लगे..
अपने आंशुओ से मेरे कपडे भिगोने लगे
मैंने पुछा क्या बात है भइये
वो बोले मुझे तो मर जाना चाहिए
अपना व्यथा सुनाने लगे
कहने लगे
एक बार मैं अपने घर की सफाई कर रहा था
इधर का समान उधर कर रहा था
अचानक मेरी जवानी की फोटो गिर गई
उस समय मेरे घने-२ बाल थे
जो देखने में बड़े बेमिसाल थे
इत्तेफाक से वो मेरे बेटे को मिल गई..
बेटे ने पुछा माँ ये किसकी तस्वीर है
बेटा बलवीर ये है तेरे बाप की तस्वीर
बेटा बोला तो ये गंजा कौन बैठा रहता है
हर एंगल से विचित्र थे
एक दिन वे मेरे पास आए
...और रोने लगे..
अपने आंशुओ से मेरे कपडे भिगोने लगे
मैंने पुछा क्या बात है भइये
वो बोले मुझे तो मर जाना चाहिए
अपना व्यथा सुनाने लगे
कहने लगे
एक बार मैं अपने घर की सफाई कर रहा था
इधर का समान उधर कर रहा था
अचानक मेरी जवानी की फोटो गिर गई
उस समय मेरे घने-२ बाल थे
जो देखने में बड़े बेमिसाल थे
इत्तेफाक से वो मेरे बेटे को मिल गई..
बेटे ने पुछा माँ ये किसकी तस्वीर है
बेटा बलवीर ये है तेरे बाप की तस्वीर
बेटा बोला तो ये गंजा कौन बैठा रहता है
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