Wednesday, 19 November 2008
संतोषम परम सुखम
संसार में मनोवांछित परिस्थितियों में सब कोई नहीं रह पता है हर एक को कोई न कोई आभाव रहता ही है यदि इसी कारण लोग असंतुष्ट रहने लगें तो फ़िर सारी दुनिया में एक भी व्यक्ति सुखी नहीं दिखाई देता, पर सोचो ऐशा नहीं है, अनेक मुसीबतों से से घिरे ऐसे व्यक्ति आज भी मौजूद है जो जीवन को संघर्ष मानकर यह लड़ई जितने के लिए निरंतर कोशिश करते रहते है साथ ही वर्तमान में जो कुछ भी सामने है उससे दुखी नहीं होते है उसे प्रभु की अनुकंपा मानकर अपना मन प्रसन्न रखते है और संतोष की साँस लेते हुए जीवन की यात्रा को आगे बढ़ते रहते है कुछ लोगों का कहना है की संतोष कर लेने से प्रगति रुक जाती है और उन्नति के प्रयतन कमजोर हो जाते है यह बातें अस्थिर मन वालों के ऊपर लागु होती है विवेकशील व्यक्ति अपने जीवन को कभी क्रमबद्ध व्यवस्था के रूप में विनार्मित करते है और वे अच्छी तरह से जानते है कि असंतुलित खिन्न और उद्विग्न मन से कुछ कर सकना तो कुछ सोच सकना भी कठिन है इसलिए हमें संतुष्ट रहना चाहिए आज जो हमारे पास है उसके लिए प्रभु को धन्यवाद देना चाहिए
Saturday, 15 November 2008
ओसामा Vs ओबामा
ओसामा :- आदाब अर्ज है भाई ओबामा
ओबामा :- जय हनुमान जी की भाई ओसामा
ओसामा :- क्या इतिफाक है की हमारे नाम कितने मिलते है
ओबामा :- गनीमत है की हमारे काम नही मिलते है
ओसामा :- बात क्या है , अमेरिका के रस्त्रियापति बनते है तुम काफिरों की जुबान बोलने लगे हो
ओबामा :- काफिर कम से कम इंसान तो होते है तुम्हारी तरह बारूद तो नही उगलते है
ओसामा :- यानी हमारी दुसमनी चलती रहेगी, इंडिया की तरह किसी दलित अशेवेत के गद्दी पर बैठते ही तुम गोरे वामन जैसे क्यूं हो रहे हो ,
ओबामा :- किसी इंडियन श्लोक मैं कहा गया है की , " हम काले है तो क्या हुआ दिलवाले है, आगे ये है की हम तेरे तेरे चाहने वाले है,
ओसामा:- ये तेरे तेरे तेरे क्या है
ओबामा:- पवन पुत्र हनुमान
ओसामा :- लाहोल बिला कुवत
ओबामा :- क्या हुआ रावन
ओसामा :- खामोश रहो , खामोश रहो, सुना है की तुम अपने ऑफिस मैं गाँधी जी की तस्वीर रखते हो , शर्म नही आती,
ओबामा ;- कुछ दिनों तक तस्वीर तुम भी लटका लो बिरादर, तुम्हे भी आने लगेगी
ओसामा:- क्या?
ओबामा:- शर्म और क्या? कुछ दिनों दहशत गर्दी से परहेज करके तो दिखो
ओसामा:- तब तो मैं हिंदुस्तान का सर्व्यदैया कार्यकर्ता लगने लगूंगा ऐसी ज़िन्दगी से तो मौत आच्छी , जब तक अमेरिका की दूसरी ईमारत ना गिरा दूँ, तब तक आराम हराम है अमां तुम तो बुश के भाई निकले भारत से तो तुमने हनुमान और गाँधी के लिए हमसे और पकिस्तान से क्या लोगे
ओबामा :- तुम दोनों से तुम्हारा आतंक हीन लूँगा
ओसामा :- फ़िर हम दोनों करंगे क्या ?
ओबामा:- हनुमान चालीसा पढ़ना
ओसामा:- ज्यादा हनुमान, हनुमान मत करो तुम्हारे हनुमान ने भी लंका में बलवा मचाया था की नहीं आगजनी की थी की नहीं वोह बजरंग बली है की बजरंग दली ?
ओबामा:- सोर बजरंगी बदरंगी नहीं है एक कविता सुनो
ओसामा:- अब ज्यादा अटल बिहारी बाजपयी मत बनो अपने यहाँ भी आर्थिक मंदी को समझाओ-बुझाओ वो नई घोडी की तरह सबको लतिया रही है उसके कारन हमें एक दो की जगह दर्जन-२ धमाके करने पड़ रहे है नंगो के बैंक लूट रहे है कशमीर मसले पर बैठ कर हिंदुस्तान और पकिस्तान के साथ चौधराहट करो भला वो बन्दर क्या बन्दर जो बन्दर बाँट न करे तन तो काला है मन भी काला करो अमेरिका कहीं के
ओबामा :- तुम कभी नहीं सुधरोगे आधे मुशर्रफ़ कहीं के मैं तुझ रंगभेद-नस्लभेद की तरह मिटा दूँगा बिरादर
ओसामा:- आतंक की कोई नस्ल नहीं होती कहा भी गया है किसी इंडियन श्लोक में
ओबामा:- क्या कहा गया है ?
ओसामा:- यही की मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे.......वगैरा-वगैरा