युवाओं के बीच मैनेजमेंट एजुकेशन का क्रेज पिछले कुछ वर्षो में तेजी से बढा है। सबकी यही कोशिश होती है कि इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) से एमबीए करने का अवसर मिले। लेकिन आज देश में ऐसे अनेक संस्थानों ने अपनी परफॉर्मेस से अच्छी-खासी प्रतिष्ठा हासिल कर ली है, जहां के ग्रेजुएट्स को कॉर्पोरेट सेक्टर मुंहमांगी सैलॅरी दे रहा है। ऐसे संस्थानों में दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद में स्थित इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) को टॉप बिजनेस स्कूलों में शुमार किया जाता है। आईएमटी का एक प्रमुख सेंटर नागपुर में भी है। खास बात यह है कि आईएमटी ने दुबई में भी अपना अब्रॉड सेंटर स्थापित किया है। मैनेजमेंट एजुकेशन के बढते क्रेज और संस्थानों के चयन के बारे में पिछले दिनों आईएमटी की ज्वॉइंट एडमिशन कमिटी के चेयरमैन डॉ. अरुण मोहन शेरी से खास बातचीत की गई। पेश हैं इसके मुख्य अंश..
इन दिनों मैनेजमेंट एजुकेशन का क्रेज क्यों इतनी तेजी से बढता जा रहा है?
देखिए, पिछले कुछ वर्षो के भीतर भारतीय कॉर्पोरेट ने दुनिया में अपनी एक नई पहचान बनाई है। इंडिया इस समय ग्लोबल मैप पर है। इकोनॉमिक ग्रोथ यहां की प्रतिभाओं की मेहनत के चलते पूरे विश्व में भारत को मान्यता मिल रही है। भारतीय कार्पोरेट जगत के प्रोफेशनल्स की छवि ग्लोबल हो गई है। यह सब संभव हो सका है सरकार के लिबरलाइजेशन और कंपनियों की अपनी पहल के चलते। भारतीय आईटी कंपनियों के बाद देश की अन्य तमाम अब विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अधिग्रहण करने लगी हैं। साथ ही, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और यहां के विशाल बाजार को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियां यहां अपने पैर जमा रही हैं। इन सभी को देखते हुए सभी देसी-विदेशी कंपनियों में मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की मांग तेजी से बढ रही है। प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों से मैनेजमेंट कोर्स करने वाले युवाओं का अच्छी कंपनियों में कैम्पस सिलेक्शन हो जाता है, और वह भी करीब 12 लाख से लेकर 36 लाख रुपये वार्षिक सैलॅरी पैकेज पर। कंपनियों की लगातार बढती संख्या को देखते हुए जिस तरह मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ रही है, उसे देखते हुए युवाओं में इसका क्रेज बढना स्वाभाविक है। मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की बढती मांग को देखते हुए पिछले कुछ वर्षो से आईआईटी करने वाले युवा भी अब बीटेक करने के तुरंत बाद जॉब करने की बजाय मैनेजमेंट कोर्स अधिक पसंद करते हैं। इसके बाद ही वे नौकरी करना चाहते हैं। दरअसल, इससे जॉब मार्केट में उनकी वैल्यू और बढ जाती है।
कॉर्पोरेट सेक्टर और खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा भारतीय मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को पसंद करने का कारण आपको क्या लगता है?
मुझे इसके कई कारण नजर आते हैं, जिनकी बदौलत देश और दुनिया की प्राय: सभी कंपनियां भारतीय मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को पसंद करती हैं और नियुक्ति में उन्हें प्राथमिकता देती हैं। इसका सबसे बडा कारण भारतीय युवाओं का खूब मेहनती होना है। उन्हें जो टार्गेट दिया जाता है, वे जब तक उसे हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन नहीं लेते। अमेरिका आदि में जो काम ओवर टाइम और काफी अधिक पैसे खर्च करके कराए जाते हैं, वही काम भारतीय युवा निर्धारित समय के भीतर और बेहद कम खर्च में अपेक्षाकृत अच्छी क्वालिटी के साथ करते हैं। इसे उनकी यूएसपी माना जाना चाहिए, जिससे दुनिया में पूरे भारत की अच्छी छवि बनती है।
मैनेजमेंट एजुकेशन की दिशा में पहला कदम क्या होना चाहिए?
यदि किसी युवा को मैनेजमेंट कोर्स करना है, तो सबसे पहले उसे किसी भी स्ट्रीम में अच्छे अंकों से ग्रेजुएशन करना होगा। इसके बाद उसे यह तय करना होगा कि उसे मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (पीजीडीबीएम) में से कौन-सा कोर्स करना है। देश में किसी भी प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जामिनेशन देना होता है। इसे क्लीयर करने के लिए अच्छी तैयारी करनी होती है।
मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में किस-किस तरह के संस्थान संचालित हैं?
देश में मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में सरकारी स्वायत्त संस्थान आईआईएम (अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ, मुंबई, इंदौर व कोझिकोड) के अलावा राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित असंख्य संस्थान हैं। इनमें से आईआईएम तथा कुछ निजी बिजनेस स्कूलों को विशेष ख्याति प्राप्त है।
प्रमुख बिजनेस स्कूलों में प्रवेश के लिए आमतौर पर कौन-कौन से एंट्रेस टेस्ट आयोजित किए जाते हैं?
आईआईएम तथा इसके समकक्ष मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश के लिए आल इंडिया लेवॅल पर कैट (ष्टन्ञ्ज) का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आईमा द्वारा मैट, एक्सएलआरआई-जमशेदपुर द्वारा एक्सएटी, एफएमएस, इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी द्वारा ओपेनमैट आदि का आयोजन किया जाता है।
कैट और अन्य एंट्रेंस में सामान्यतया किन-किन क्षेत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं?
इस तरह की प्रवेश परीक्षाओं में कई क्षेत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं : क्वांटिटेटिव एप्टीटयूड, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, वर्बल एबिलिटी, डाटा एंटरप्रिटेशन, रीजनिंग, डाटा सफिंशिएंसी आदि। अन्य परीक्षाओं (जैसे-मैट) में मैथमेटिकल स्किल तथा इंडियन और ग्लोबल एनवॉयरमेंट से जुडी जानकारी की परीक्षा भी ली जाती है।
मैनेजमेंट एजुकेशन के लिए संस्थान का चयन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसी भी स्टूडेंट को बी-स्कूल का चयन करते समय संस्थान की बिल्डिंग या बाहरी चमक-दमक पर कतई नहीं जाना चाहिए। मैनेजमेंट एजुकेशन में इमारत बिल्कुल महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण होता है-फैकल्टी प्रोफाइल। संस्थान की इनटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ही उसकी पहचान होती है। इसलिए किसी भी संस्थान में एडमिशन लेने से पहले यह देखना चाहिए कि वहां की फैकल्टी कितनी अच्छी है, संस्थान के प्रमोटर कौन हैं, उनका विजन कैसा है, अलमुनि बेस कैसा रहा है, अलमुनि को मार्केट में कैसा रिस्पॉन्स मिला है, इंडस्ट्री उस संस्थान के ग्रेजुएट्स को किस तरह देखती है। इन सबके अलावा यह भी देखना चाहिए कि वह संस्थान उस देश के सरकारी निकाय द्वारा मान्यता प्राप्त है या नहीं। इसके बाद उस संस्थान की प्रतिष्ठा देखनी चाहिए। प्रतिष्ठा की जांच दो स्तरों पर की जानी चाहिए-एक तो, वहां की पढाई का स्तर और फैकल्टी कैसी है और दूसरा, वहां के प्लेसमेंट की क्या स्थिति है। इसके लिए उस संस्थान पहले पढ चुके स्टूडेंट की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए।
आईएमटी जैसे संस्थान फुलटाइम के साथ-साथ डिस्टेंस लर्निग से मैनेजमेंट करा रहे हैं। इसका क्या कॉन्सेप्ट है?
दरअसल, यह कोर्स खासकर वर्किग एग्जीक्यूटिव्स के लिए है, जिनके पास फुलटाइम कोर्स करने का समय नहीं है। लेकिन हमारे यहां के डिस्टेंस प्रोग्राम के तहत ऐसे लोग फुलटाइम जैसी सभी सुविधाओं के साथ कोर्स पूरा कर सकते हैं। एमबीए करने का उन्हें दो तरह से फायदा मिलता है, एक तो प्रमोशन मिल जाता है और दूसरे उनकी सैलॅरी में भी अच्छा-खासा इजाफा होता है। कॉर्पोरेट सेक्टर भी अपने एग्जीक्यूटिव्य को ऐसे कोर्स करने के लिए प्रेरित कर रहा है। आईएमटी में डिस्टेंस मोट में अब तक पांच हजार से अधिक इनरोलमेंट हो चुके हैं। खास बात यह है कि आईएमटी अपने स्टूडेंट्स को ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी सुविधा उपलब्ध कराने वाला पहला संस्थान है। इसका मेंबर बनकर कहीं भी रहकर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। डिस्टेंस प्रोग्राम में भी फुलटाइम फैकल्टी है। कोर्स मैटीरियल में केस स्टडी और सेल्फ असेसमेंट भी होता है। नियमित रूप से पर्सनल कॉन्टैक्ट क्लासेज भी होते हैं।
मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को सैलॅरी कैसी ऑफर की जा रही है?
सामान्यतया एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट को शुरुआत में 7 से 12 लाख रुपये मासिक की सैलॅरी का ऑफर मिलता है। अपवाद के रूप में कुछ स्टूडेंट को फॉरेन प्लेसमेंट के तहत 1 करोड रुपये का ऑफर भी मिल जाता है।
पिछले कुछ समय से मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स द्वारा अपना उद्यम शुरू करने का ट्रेन्ड देखा जा रहा है। इसके पीछे क्या कारण है?
यह तो देश के लिए बहुत अच्छा संकेत है। इस तरह से उद्यम शुरू करके वह कई लोगों को रोजगार देता है और देश की आर्थिक उन्नति में भागीदार बनता है। इसे अधिक से अधिक बढावा दिया जाना चाहिए।