Thursday, 22 May 2008

व्यापार में सफलता का रहस्य

प्रतिस्पर्धा के इस युग मे आपको कई तरह के उत्पाद व सेवाएँ बेचना होता है व उन्हे बेचना सिखाया भी जाता है। इन सभी तकनीकों, योजनाओं से परे कुछ ऐसे तथ्य हैं जो आपके उत्पाद या सेवाओं को बाज़ार तक लाने मे सहायक हो सकते है। इन सुझावो से आपकी मार्किटिंग गतिविधियों में बदलाव आएगा और आप बेहतर नतीजे पाएगें।

आपका उत्पाद या सेवा कोई भी क्यो न हो, सफलता पाने के लिए पूरी निष्‍ठा,व वचनबद्धता के साथ मार्किटिंग से जुडी प्रकिया निभानी होगी। आपने ग्राहको को सेवाओं की सक्षमता व गुणवता का एहसास दिलातें रहें ताकि वे निश्‍चिंत होकर आप पर निर्भर हो सकें। ऐसा इसलिए करना भी ज़रुरी है क्योकि दिखाई न देने वाला दिमाग से भी निकल जाता है प्रतिदिन आपकी सेवाओ की गुणवता से जुडे संदेश व वाक्य बाज़ार मे जाने चाहिए। यह कार्य लगातार होना चाहिए। अधिकतर ग्राहको के पास जानकारी का कोई दुसरा स्त्रोत नही होता। वे आप से ही आप के बारे मे जानना चाहते है। एक सावधानी, सेवा की गुणवत्ता, विज्ञापन का विकल्प नही है। विज्ञापन मे सेवा या उत्पाद के श्रेष्ठ बिंदुओ पर बल दिया जाना चाहिए जो कि जांच होने पर भी खरा उतरे। एक अच्छा उत्पाद, मार्किटिंग के साथ अपने क्षेत्र मे काफी ऊँचा उठ सकता है।

बेहतर व अच्छी सेवाएँ उपलब्द कराने के साथ-साथ उन की अच्छी मार्केटिगं होनी भी ज़रुरी है। विज्ञापन, मैगज़ीन, न्युज़ लैटर, व ब्रोशर आदि जो उत्पाद की जानकारी दें, उन्हे भी ऊची क्‍वालिटी का होना चाहिए। यदि चित्र अच्छे नही हुए तो इस से भी बुरा प्रभाव पडता है। यदि लेखन अच्छा होगा तो पाठक उसकी ओर आकर्षित होगा और उसे पढेगा। इसके विपरीत घटिया कागज़, घटिया लिखाई आप के व्यवसाय को नुकसान पहुँचा सकता है लोग इसे पढना भी पसंद नही करेगे और ऐसा कागज़ सीधे कूडे की टोकरी मे जा सकते है।

तेज़ी से होते तकनीकी सुधार, विकास व विस्तार ने उद्यमियो को सोचने पर विवश कर दिया है कि प्रमोशन, कैपेंन उनकी सफलता के लिए फायदेमंद हो सकता है । दीर्घकालिन मार्केटिंग के बल पर वे अपने ग्राहको को विश्‍वास दिलाने मे कामयाब होते है की उनका उत्पाद ही क्‍वालिटी मे सबसे उत्तम है। सफलता अचानक नही मिलती। यह बहुत दबे पांव आपके पास आती है।

नए व आधुनिक डिज़ाइनो के अत्पाद तेज़ी से बाज़ार मे आ रहे है। इस के लिए ज़रुरी है कि आप भी अपने नीतियों मे बदलाव लाएँ और यही न करते रहें, "हम तो इस काम को इसी तरीके से करते आ रहे है और ऐसा ही करेगे"।

ग्राहको के विचार व ज़रुरते भी लगातार बदलते है। इसलिए ज़रुरी नही कि पिछले वर्ष वाली नीति, इस वर्ष भी आपके काम आएगी। आपको सबसे पहले उपभोक्ता की मांग पर ध्यान देना चाहिए जो पिछले वर्ष से अलग हो सकती है। मार्केटिंग के क्षेत्र मे कोई फिट फार्मूला नही चलता। आपको धारा के अनुकूल आपना जहाज चलाना होगा।

सदा एक ही नीति काम करेगी, ऐसा मानने की मूर्खता न करें। याद रखें कि कितने ही लोग आपका स्थान लेने को तैयार बैठे हैं। आपकी ज़रा सी लापरवाही उन्हे उँचा उठने का अवसर दे सकती है। एक बात सच है कि आपके नीति बाज़ार में चल पडी तो शीघ्र ही प्रतिस्पर्धी भी उस की नकल कर लेंगे। आपको अपने स्थिति पर बने रहने के लिए और भी कडी मेहनत करनी होगी।

कडे परिश्रम का कोई विकल्प नही होता। थाँमस जैफरलन इस विष्य मे कहते है " मैने पाया कि मै जितना मेहनत कर रहा था, भाग्य मेरे उतने ही करीब आ रहा था"।

Monday, 5 May 2008

बजट २००८- एक सच्चाई

हर साल की तरह इस साल भी आम बजट आया। इस साल के बजट को सूंघते ही आगामी चुनाव की खुशबू आने लगती है क्योंकि इस साल जब वितीयमंत्री पी चिताम्बरम ने आपने चमड़े के थैले से जब बजट निकला तो यह बात अपने आप सामने आ गई की चुनाव नजदीक है। किसानों के लिए ६० हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज माफ़ हुआ, व्यापारी वर्ग के लिए आयकर मई भारी छुट दी गई है, पहेले यह सब कुछ उस बदलाव का हिस्सा लगा जिस की अब कुछ कम ही गुंजाईश लगती है। और सरकार को जिस महंगाई की तरफ नजर उठानी चाहिए उसकी तरफ वह पीठ किए हुए है। आज भी देश की अधिकांश जनता के पास उसकी मूलभूत जरूरते पुरा करने के साधन नही है। इसे मे केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया लाखो करोडो का बजट किस काम का है। चपरासी से लेकर ऊँचे आधिकारी तक हर जगह ऐसे लोग बैठे हुए है जो की इस आस मे रहेते है की पैसा कैसे वसूल किया जाए और फ़िर हड़प जाए, दिल्ली से चला १०० रुपये का नोट आम आदमी तक पहुँचते - २ १० का नोट बन जाता है, यह जादूगरी भ्रस्ताचार के उपासक करके दिखाते है, चिताम्बरम कुछ भी बोले किंतु यह बजट हो या इस से भी अच्छा बजट , आम जनता की माली हालत मे कभी भी कोई सुधार नही होने वाला है, बजट मे खर्च हुआ करोडो रुपये सरकारी विभाग मे ही खो कर रह जाता है, आम आदमी के हिस्से मे सिर्फ़ और सिर्फ़ झूठन ही आती है, मीडिया जो आम आदमी की आवाज़ पहुँचा सकती है उसके पास ग्लामौर, सलेबृति और हिंसा के आलावा किसी और काम के लिए फुरसत ही नही है ( शायद पार्ट टाइम मे न्यूज़ चेन्नालो ने विवाह शादी की वीडियो ग्राफी का काम शुरू कर दिया है, )

देश के संपन वर्ग को आम बजट से कोई फर्क नही पड़ता है लेकिन उस ८० करोड़ जनता का क्या होगा जिनकी बात कोई नही सुनता है।

Thursday, 1 May 2008

मैनेजमेंट एजुकेशन का बढ़ रहा है क्रेज

युवाओं के बीच मैनेजमेंट एजुकेशन का क्रेज पिछले कुछ वर्षो में तेजी से बढा है। सबकी यही कोशिश होती है कि इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) से एमबीए करने का अवसर मिले। लेकिन आज देश में ऐसे अनेक संस्थानों ने अपनी परफॉर्मेस से अच्छी-खासी प्रतिष्ठा हासिल कर ली है, जहां के ग्रेजुएट्स को कॉर्पोरेट सेक्टर मुंहमांगी सैलॅरी दे रहा है। ऐसे संस्थानों में दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद में स्थित इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) को टॉप बिजनेस स्कूलों में शुमार किया जाता है। आईएमटी का एक प्रमुख सेंटर नागपुर में भी है। खास बात यह है कि आईएमटी ने दुबई में भी अपना अब्रॉड सेंटर स्थापित किया है। मैनेजमेंट एजुकेशन के बढते क्रेज और संस्थानों के चयन के बारे में पिछले दिनों आईएमटी की ज्वॉइंट एडमिशन कमिटी के चेयरमैन डॉ. अरुण मोहन शेरी से खास बातचीत की गई। पेश हैं इसके मुख्य अंश..

इन दिनों मैनेजमेंट एजुकेशन का क्रेज क्यों इतनी तेजी से बढता जा रहा है?

देखिए, पिछले कुछ वर्षो के भीतर भारतीय कॉर्पोरेट ने दुनिया में अपनी एक नई पहचान बनाई है। इंडिया इस समय ग्लोबल मैप पर है। इकोनॉमिक ग्रोथ यहां की प्रतिभाओं की मेहनत के चलते पूरे विश्व में भारत को मान्यता मिल रही है। भारतीय कार्पोरेट जगत के प्रोफेशनल्स की छवि ग्लोबल हो गई है। यह सब संभव हो सका है सरकार के लिबरलाइजेशन और कंपनियों की अपनी पहल के चलते। भारतीय आईटी कंपनियों के बाद देश की अन्य तमाम अब विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अधिग्रहण करने लगी हैं। साथ ही, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और यहां के विशाल बाजार को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियां यहां अपने पैर जमा रही हैं। इन सभी को देखते हुए सभी देसी-विदेशी कंपनियों में मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की मांग तेजी से बढ रही है। प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों से मैनेजमेंट कोर्स करने वाले युवाओं का अच्छी कंपनियों में कैम्पस सिलेक्शन हो जाता है, और वह भी करीब 12 लाख से लेकर 36 लाख रुपये वार्षिक सैलॅरी पैकेज पर। कंपनियों की लगातार बढती संख्या को देखते हुए जिस तरह मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ रही है, उसे देखते हुए युवाओं में इसका क्रेज बढना स्वाभाविक है। मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की बढती मांग को देखते हुए पिछले कुछ वर्षो से आईआईटी करने वाले युवा भी अब बीटेक करने के तुरंत बाद जॉब करने की बजाय मैनेजमेंट कोर्स अधिक पसंद करते हैं। इसके बाद ही वे नौकरी करना चाहते हैं। दरअसल, इससे जॉब मार्केट में उनकी वैल्यू और बढ जाती है।

कॉर्पोरेट सेक्टर और खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा भारतीय मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को पसंद करने का कारण आपको क्या लगता है?

मुझे इसके कई कारण नजर आते हैं, जिनकी बदौलत देश और दुनिया की प्राय: सभी कंपनियां भारतीय मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को पसंद करती हैं और नियुक्ति में उन्हें प्राथमिकता देती हैं। इसका सबसे बडा कारण भारतीय युवाओं का खूब मेहनती होना है। उन्हें जो टार्गेट दिया जाता है, वे जब तक उसे हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन नहीं लेते। अमेरिका आदि में जो काम ओवर टाइम और काफी अधिक पैसे खर्च करके कराए जाते हैं, वही काम भारतीय युवा निर्धारित समय के भीतर और बेहद कम खर्च में अपेक्षाकृत अच्छी क्वालिटी के साथ करते हैं। इसे उनकी यूएसपी माना जाना चाहिए, जिससे दुनिया में पूरे भारत की अच्छी छवि बनती है।

मैनेजमेंट एजुकेशन की दिशा में पहला कदम क्या होना चाहिए?

यदि किसी युवा को मैनेजमेंट कोर्स करना है, तो सबसे पहले उसे किसी भी स्ट्रीम में अच्छे अंकों से ग्रेजुएशन करना होगा। इसके बाद उसे यह तय करना होगा कि उसे मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (पीजीडीबीएम) में से कौन-सा कोर्स करना है। देश में किसी भी प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्जामिनेशन देना होता है। इसे क्लीयर करने के लिए अच्छी तैयारी करनी होती है।

मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में किस-किस तरह के संस्थान संचालित हैं?

देश में मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में सरकारी स्वायत्त संस्थान आईआईएम (अहमदाबाद, बेंगलुरु, लखनऊ, मुंबई, इंदौर व कोझिकोड) के अलावा राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित असंख्य संस्थान हैं। इनमें से आईआईएम तथा कुछ निजी बिजनेस स्कूलों को विशेष ख्याति प्राप्त है।

प्रमुख बिजनेस स्कूलों में प्रवेश के लिए आमतौर पर कौन-कौन से एंट्रेस टेस्ट आयोजित किए जाते हैं?

आईआईएम तथा इसके समकक्ष मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश के लिए आल इंडिया लेवॅल पर कैट (ष्टन्ञ्ज) का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आईमा द्वारा मैट, एक्सएलआरआई-जमशेदपुर द्वारा एक्सएटी, एफएमएस, इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी द्वारा ओपेनमैट आदि का आयोजन किया जाता है।

कैट और अन्य एंट्रेंस में सामान्यतया किन-किन क्षेत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं?

इस तरह की प्रवेश परीक्षाओं में कई क्षेत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं : क्वांटिटेटिव एप्टीटयूड, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, वर्बल एबिलिटी, डाटा एंटरप्रिटेशन, रीजनिंग, डाटा सफिंशिएंसी आदि। अन्य परीक्षाओं (जैसे-मैट) में मैथमेटिकल स्किल तथा इंडियन और ग्लोबल एनवॉयरमेंट से जुडी जानकारी की परीक्षा भी ली जाती है।

मैनेजमेंट एजुकेशन के लिए संस्थान का चयन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किसी भी स्टूडेंट को बी-स्कूल का चयन करते समय संस्थान की बिल्डिंग या बाहरी चमक-दमक पर कतई नहीं जाना चाहिए। मैनेजमेंट एजुकेशन में इमारत बिल्कुल महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण होता है-फैकल्टी प्रोफाइल। संस्थान की इनटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ही उसकी पहचान होती है। इसलिए किसी भी संस्थान में एडमिशन लेने से पहले यह देखना चाहिए कि वहां की फैकल्टी कितनी अच्छी है, संस्थान के प्रमोटर कौन हैं, उनका विजन कैसा है, अलमुनि बेस कैसा रहा है, अलमुनि को मार्केट में कैसा रिस्पॉन्स मिला है, इंडस्ट्री उस संस्थान के ग्रेजुएट्स को किस तरह देखती है। इन सबके अलावा यह भी देखना चाहिए कि वह संस्थान उस देश के सरकारी निकाय द्वारा मान्यता प्राप्त है या नहीं। इसके बाद उस संस्थान की प्रतिष्ठा देखनी चाहिए। प्रतिष्ठा की जांच दो स्तरों पर की जानी चाहिए-एक तो, वहां की पढाई का स्तर और फैकल्टी कैसी है और दूसरा, वहां के प्लेसमेंट की क्या स्थिति है। इसके लिए उस संस्थान पहले पढ चुके स्टूडेंट की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए।

आईएमटी जैसे संस्थान फुलटाइम के साथ-साथ डिस्टेंस लर्निग से मैनेजमेंट करा रहे हैं। इसका क्या कॉन्सेप्ट है?

दरअसल, यह कोर्स खासकर वर्किग एग्जीक्यूटिव्स के लिए है, जिनके पास फुलटाइम कोर्स करने का समय नहीं है। लेकिन हमारे यहां के डिस्टेंस प्रोग्राम के तहत ऐसे लोग फुलटाइम जैसी सभी सुविधाओं के साथ कोर्स पूरा कर सकते हैं। एमबीए करने का उन्हें दो तरह से फायदा मिलता है, एक तो प्रमोशन मिल जाता है और दूसरे उनकी सैलॅरी में भी अच्छा-खासा इजाफा होता है। कॉर्पोरेट सेक्टर भी अपने एग्जीक्यूटिव्य को ऐसे कोर्स करने के लिए प्रेरित कर रहा है। आईएमटी में डिस्टेंस मोट में अब तक पांच हजार से अधिक इनरोलमेंट हो चुके हैं। खास बात यह है कि आईएमटी अपने स्टूडेंट्स को ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी सुविधा उपलब्ध कराने वाला पहला संस्थान है। इसका मेंबर बनकर कहीं भी रहकर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। डिस्टेंस प्रोग्राम में भी फुलटाइम फैकल्टी है। कोर्स मैटीरियल में केस स्टडी और सेल्फ असेसमेंट भी होता है। नियमित रूप से पर्सनल कॉन्टैक्ट क्लासेज भी होते हैं।

मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स को सैलॅरी कैसी ऑफर की जा रही है?

सामान्यतया एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट को शुरुआत में 7 से 12 लाख रुपये मासिक की सैलॅरी का ऑफर मिलता है। अपवाद के रूप में कुछ स्टूडेंट को फॉरेन प्लेसमेंट के तहत 1 करोड रुपये का ऑफर भी मिल जाता है।

पिछले कुछ समय से मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स द्वारा अपना उद्यम शुरू करने का ट्रेन्ड देखा जा रहा है। इसके पीछे क्या कारण है?

यह तो देश के लिए बहुत अच्छा संकेत है। इस तरह से उद्यम शुरू करके वह कई लोगों को रोजगार देता है और देश की आर्थिक उन्नति में भागीदार बनता है। इसे अधिक से अधिक बढावा दिया जाना चाहिए।