एक गंजे हमारे मित्र थे
हर एंगल से विचित्र थे
एक दिन वे मेरे पास आए
...और रोने लगे..
अपने आंशुओ से मेरे कपडे भिगोने लगे
मैंने पुछा क्या बात है भइये
वो बोले मुझे तो मर जाना चाहिए
अपना व्यथा सुनाने लगे
कहने लगे
एक बार मैं अपने घर की सफाई कर रहा था
इधर का समान उधर कर रहा था
अचानक मेरी जवानी की फोटो गिर गई
उस समय मेरे घने-२ बाल थे
जो देखने में बड़े बेमिसाल थे
इत्तेफाक से वो मेरे बेटे को मिल गई..
बेटे ने पुछा माँ ये किसकी तस्वीर है
बेटा बलवीर ये है तेरे बाप की तस्वीर
बेटा बोला तो ये गंजा कौन बैठा रहता है
Thursday 25 December 2008
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