शिक्षक और शिष्य
हमारे समस्त धार्मिक ग्रन्थ यह बात बताते है की शिक्षक और शिष्य का सम्बन्ध पिता और पुत्र से भी बढ़ कर है क्योंकि पिता ने तो मुझे ये अमूल्य शरीर प्रदान किया है परन्तु शिक्षक ने जीवन मे आगे बढ़ने के लिए सदेव प्रयास किया है, शिक्षक निर्माण कर रास्ता बताता है, शिष्य का भी ये कर्त्तव्य है की अपने शिक्षक को सब से ऊपर रखे और पुरा सम्मान दे
आज की हालात में शिक्षा का इस्टर अत्यंत ही नीचे चला गया है , आज शिक्षक और शिष्य के बीच मे गहरी खाई बन गई है, आज का छात्र आपने शिक्षको के प्रति आदर भावः नही रखता है, उसके काम आशोभानिये हो रहे है , आज का छात्र अपने शिक्षक के साथ अभ्रद व्यवहार करने में, उसे नीचा दिखाने, अजीब गरीब सवालो को करने से जरा भी नही हिच्कचाता है तो क्या इस पूरे समस्या के जिमेदार छात्र ही है आज के शिक्षक की मानसिकता भी बदल चुकी है, ये शिक्षक जिस तरह से छात्रो के साथ बर्ताव करते है,छात्र भी उसी प्रकार से पेश आते है, यदि कोई छात्र आर्थिक समस्या के कारन किसी शिक्षक से टूशन नही पढ़ पता है तो उसे शिक्षक के क्रोध का सामना करना पड़ता है,जिसके प्रतिक्रिया में शिष्य ऐसी हरकते करता है, इस समस्या के अतिरिक्त और भी कारन है जिस के कारन शिक्षक और शिष्य के बीच सम्बन्ध ख़राब हो रहे है,
परन्तु मैं तो इस छोटे से लेख के मधियम से अपने छात्र दोस्तों से यही कहूँगा की हमे परस्थितियों को अपने अनुकूल बनते हुए किसी भी तरह की कोई भी ग़लत कार्य नही करना चाहिए जिससे हमारे और शिक्षक के मधीय कोई बैमानी समस्या आए, और शिक्षको को भी अपनी मानसिकता बदलनी होगी और ज्यादा से ज्यादा अपने शिष्यों की सहियता करनी चहिये , तभी वे पूरे सम्मान के काबिल हो पाएँगे
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