Tuesday 12 August 2008

रक्षा-बंधन

सम्पूर्ण भारत वर्ष में हिन्दुओ के प्रमुख त्यौहारों में रक्षा बंधन का स्थान अहम् है रक्षा बंधन दो शब्दों से मिल कर बना है, रक्षा + बंधन ,जिसका शाब्दिक अर्थ है रक्षा बंधन होता है पर यदि हम गहराई में सोचे तो हमे मिलेगा की एक बहन के द्वारा भाई की सम्पूर्ण भाविष्य हेतु की गई कामना है असीम प्यार से कलाई पर बंधे गए धागों को रक्षा बंधन की संज्ञा देते है,इस बंधन के द्वारा एक बहन अपने भाई को ज़िन्दगी भर के लिए अटूट प्रेम एवं विश्वास के दायरे में रख देती है , ये अटूट कच्चे धागों का प्यार भाई के सुखमय जीवन हेतु की गई कामना को भी दर्शाता ही है साथ ही साथ भाई के कर्तव्य को भी इंगित करता है एक भाई का ये नेतेक परम कर्तव्य बन जाता है की जीते जी उसकी बहन को को परेशानी न हो और जितना हो सके उतना प्यार दुलार वो अपनी बहन पर लुटाए एक बहन भाई की कलाई पर कच्चे धागे की डोरी बंधाते हुए मन ही मन जो कामनाए करती है उसको हम इस सवैये के मधियम से व्यक्त कर रहा हूँ,

" प्रेम हमारा बना रहे, हर भाई के राग-राग में जग में वो न्याय प्रतिष्ठा पावे,
दुःख दर्द से दूर रहे मेरा भाई, दही माखन दूध का भोग उडावे ,
कीर्ति आनंद का रतन मेले , होके स्वतंत वह,
जग में सफलता के धवजा फेहेरावे ,
दीपक की सी लो लेकर वह , जग में नाम कमावे ,
दिन दुखी की सेवा करके , अबला वन की लाज बचावे "

इतना ही नही एक भाई अपनी बहन के बारे में बहुत ही अच्छे -अच्छे विचारो को सोचता है, राखी बंधने के समय जिस तरह की अभिलाषा इच्छाएँ एक भाई के मन में अपनी बहन के प्रति होती है उनको चंद पंक्तियों में मधियम से व्यक्त किया जा रहा है-
"अम्बर में जितने तारे हो,
जीवन में उतनी बहारें हो
धरती पर जितना उपवन हो,
वो सारे सुमन तुम्हारे हो,
सजी रहे खुशियों की महफिल ,
सदा रहो खुशाल ,
सलामत रहे प्रभु बहन हमारी
वो जिए हजारो साल "

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