एक बार एक मादा उल्लू के अहसान का बदला चुकाने के लिए एक गरुड ने उससे वायदा किया कि वह उस उल्लू के बच्चों को कभी नुकसान नही पहुँचाएगा । पर तुम मेरे बच्चों को कैसे पहचानोगे? मादा उल्लू ने बडी उत्सुकता से पूछा, यह कैसे पता चले कि तुम उन्हे किसी अन्य चिडिया के बच्चे नही समझ लोगे?
ऐसा करो कि तुम खुद ही बता दो वे कैसे दिखते हैं, गरुड ने पूछा?
वास्तव मे वे किसी अन्य चिडिया के बच्चे जैसे नही है, मादा उल्लू ने गर्व से सीना फुला कर कहा। वे नरम है, गुदगुदे हैं और दुनियां के सब से सुन्दर बच्चे हैं। इतने सुन्दर बच्चे तुम ने कभी नही देखे होगे।
एक शाम गरुड को एक ऐसा घोंसला मिला जिसमे चिडिया के कुछ बच्चे चिल्ला रहे थे। उन के लाल मुँह खुले हुए थे। वह रुका और थोडी देर विचार करने के बाद वह खुद से बोला " ज़ाहिर है यह तो उस उल्लू के बच्चे नही हो सकते क्योकि मादा उल्लू ने तो कहा था कि उस के बच्चे बेहद खुबसुरत हैं और यह बच्चे तो बहुत बद्सूरत है" उस के बाद बिना कुछ सोचे वह उन बच्चों पर टूट पडा और सब को खा गया। वहां सबकुछ खून सने पंख पडे थे।
गरुड अपना वादा कैसे भूल गया? वह रोते-रोते बोली। मैने तो उसे बता दिया था कि मेरे बच्चे सब से सुन्दर है।
सबक; हर माँ यही समझती है कि उस के बच्चे सब से सुन्दर व अच्छे हैं ।
Monday 14 April 2008
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